ध्यानयोगः — Dhyāna-Yoga
Discipline of Meditation and Mental Restraint
सम्बन्ध-- भगवान्के मुखसे यह बात सुनकर कि अबतक मेरे बहुत-से जन्म हो चुके हैं. यह जाननेकी इच्छा होती है कि आपका जन्म किस प्रकार होता है और आपके जन्ममें तथा अन्य लोगोंके जन्ममें क्या भेद है। अतएव इस बातको समझानेके लिये भगवान् अपने जन्मका तत्त्व बतलाते हैं-- अजोऊ5पि सन्नव्ययात्मा भूतानामीश्व॒रोडपि सन् । प्रकृतिं स्वामधिष्ठाय सम्भवाम्यात्ममाययाएें,मैं अजन्मा और अविनाशीस्वरूप होते हुए भी तथा समस्त प्राणियोंका ईश्वर होते हुए भी अपनी प्रकृतिको अधीन करके अपनी योगमायासे प्रकट होता हूं
arjuna uvāca — ajo 'pi sann avyayātmā bhūtānām īśvaro 'pi san | prakṛtiṁ svām adhiṣṭhāya sambhavāmy ātma-māyayā ||
Đức Thế Tôn phán: “Dẫu Ta là Đấng vô sinh, bản thể bất hoại, và là Chúa tể của muôn loài, Ta vẫn nương quyền tự tại đối với Prakṛti của chính Ta mà hiển lộ bằng Yogamāyā của Ta.”
अजुन उवाच