युधिछिर उवाच मान हित्वा प्रियो भवति क्रोधं हित्वा न शोचति । काम हित्वार्थवान् भवति लोभ हित्वा सुखी भवेत्,युधिष्ठिर बोले--मानको त्याग देनेपर मनुष्य प्रिय होता है, क्रोधको त्यागकर शोक नहीं करता, कामको त्यागकर वह अर्थवान् होता है और लोभको त्यागकर सुखी होता है
یُدھِشٹھِر نے کہا—تکبر (مان) چھوڑ دینے سے آدمی محبوب ہو جاتا ہے؛ غصہ چھوڑ دینے سے غم نہیں کرتا؛ شہوت/خواہش (کام) چھوڑ دینے سے وہ صاحبِ ثروت (ارثوان) بنتا ہے؛ اور لالچ (لوبھ) چھوڑ دینے سے خوش و خرم رہتا ہے۔
युधिछिर उवाच