युधिषछ्िर उवाच यदा धर्मश्न भार्या च परस्परवशानुगौ । तदा धर्मार्थकामानां त्रयाणामपि संगम:,युधिछ्िर बोले--जब धर्म और भार्या-ये दोनों परस्पर अविरोधी होकर मनुष्यके वशमें हो जाते हैं, उस समय धर्म, अर्थ और काम--इन तीनों परस्पर विरोधियोंका भी एक साथ रहना सहज हो जाता है-
یُدھِشٹھِر نے کہا—جب دھرم اور بیوی—یہ دونوں باہم بےتضاد ہو کر انسان کے قابو میں ہوں، تب دھرم، اَرتھ اور کام—ان تینوں کا بھی ایک ساتھ اجتماع ہو جاتا ہے۔
युधिषछ्िर उवाच