न हि वैरं समासाद्य प्रशाम्यति वृकोदर: | सुचिरादपि भीमस्य न हि वैरं प्रशाम्यति । यावदन्तं न नयति शात्रवाउछत्रुकर्शन:,'भीमसेन वैर हो जानेपर कभी शान्त नहीं होता। भीमसेनका वैर तबतक दीर्घकालके बाद भी समाप्त नहीं होता है, जबतक वह शत्रुपक्षका संहार नहीं कर डालता
وِرکودر بھیم سین ایک بار دشمنی اختیار کر لے تو کبھی ٹھنڈا نہیں ہوتا۔ بہت زمانہ گزر جانے پر بھی اس کی دشمنی تب تک نہیں مٹتی جب تک دشمنوں کو کچلنے والا بھیم مخالفین کا خاتمہ نہ کر دے۔
वैशम्पायन उवाच