Kṛṣṇa at Duryodhana’s House: Refusal of Hospitality and Departure to Vidura (कृष्णस्य धार्तराष्ट्रनिवेशनगमनम्)
त्वंत्राता त्वं महद् ब्रह्म त्वयि सर्व प्रतिष्ठितम् । यथैवात्थ तथैवैतत् त्वयि सत्यं भविष्यति,प्रत्येक कार्यकी व्यवस्थामें, मित्रोंके संग्रहमें तथा बुद्धि और पराक्रममें भी जो तुम्हारा अद्भुत प्रभाव है, उससे मैं परिचित हूँ। हमारे कुलमें तुम्हीं धर्म हो, तुम्हीं सत्य हो, तुम्हीं महान् तप हो, तुम्हीं रक्षक और तुम्हीं परब्रह्म परमात्मा हो। सब कुछ तुममें ही प्रतिष्ठित है। तुम जो कुछ कहते हो, वह सब तुम्हारे संनिधानमें सत्य होकर ही रहेगा
tvaṁ trātā tvaṁ mahad brahma tvayi sarva pratiṣṭhitam | yathaivāttha tathaivaitat tvayi satyaṁ bhaviṣyati ||
تم ہی محافظ ہو، تم ہی عظیم برہمن ہو؛ سب کچھ تم ہی میں قائم ہے۔ جیسے تم نے کہا ہے ویسا ہی ہوگا—تمہاری حضوری میں وہی سچ بن کر ٹھہرے گا۔
वैशम्पायन उवाच