अध्याय ८ — शल्यस्य सत्कारः, वरदानं, पाण्डवसमागमश्च (Śalya’s Reception, the Boon, and Meeting the Pāṇḍavas)
युधिष्ठिर! महात्मा पुरुष भी समय-समयपर दु:ख पाते हैं। पृथ्वीपते! देवताओंने भी बहुत दुःख उठाये हैं ।। इन्द्रेण श्रूयते राजन् सभार्येण महात्मना । अनुभूतं महद् दुःखं देवराजेन भारत,भरतवंशी नरेश! सुना जाता है कि पत्नीसहित महामना देवराज इन्द्रने भी महान् दुःख भोगा है
اے یُدھِشٹھِر! مہاتما پُرش بھی وقتاً فوقتاً دکھ پاتے ہیں۔ اے زمین کے پالک! دیوتاؤں نے بھی بہت سے دکھ سہے ہیں۔ اے راجن، اے بھرت ونشی نریش! سنا جاتا ہے کہ عظیم النفس دیوراج اندر نے بھی اپنی پتنی سمیت بڑا دکھ بھوگا تھا۔
शल्य उवाच