भीमसेनस्य आत्मबलप्रशंसा — Bhīmasena’s Assertion of Strength
Udyoga Parva, Adhyāya 74
आरुज्य वक्षान् निर्मूलान् गज: परिरुजन्निव | निष्नन् पद्धिः क्षितिं भीम निष्टनन् परिधावसि,भीम! जैसे हाथी वृक्षोंको जड़-मूलसहित उखाड़कर उन्हें पैरोंकी ठोकरोंसे टूक-टूक कर डालता है, उसी प्रकार तुम भी पैरोंसे पृथ्वीपर आघात करते हुए जोर-जोरसे गर्जते और चारों ओर दौड़ते थे
ārujya vakṣāṁ nirmūlān gajaḥ parirujann iva | niṣṇan paddhiḥ kṣitiṁ bhīma niṣṭanan paridhāvasi ||
اے بھیم! جیسے ہاتھی درختوں کو جڑ سمیت اکھاڑ کر اپنے پاؤں کی ٹھوکروں سے چورا چورا کر دیتا ہے، اسی طرح تم بھی پاؤں سے زمین پر ضربیں لگاتے، زور زور سے گرجتے اور ہر طرف دوڑتے پھرتے تھے۔
वैशम्पायन उवाच