व्यास उवाच सम्पृच्छते धृतराष्ट्राय संजय आचरक्ष्व सर्व यावदेषो<नुयुद्धक्ते । सर्व यावत् वेत्थ तस्मिन् यथावद् याथातथ्यं वासुदेवे3र्जुने च,व्यासजीने कहा--संजय! धुृतराष्ट्र तुमसे जो कुछ जानना चाहते हैं, वह सब इन्हें बताओ। ये भगवान् श्रीकृष्ण तथा अर्जुनके विषयमें जो कुछ पूछते हैं, वह सब, जितना तुम जानते हो, उसके अनुसार यथार्थरूपसे कहो
ویاس نے کہا—سنجے! دھرتراشٹر تم سے جو کچھ پوچھتے ہیں، جب تک وہ پوچھیں، سب انہیں بتاؤ۔ واسودیو (شری کرشن) اور ارجن کے بارے میں تم جتنا جانتے ہو، اسے ٹھیک ٹھیک اور سچائی کے ساتھ بیان کرو۔
व्यास उवाच