Udyoga-parva Adhyāya 47 — Arjuna’s Deterrent Declaration
Sañjaya’s Report
ये वै राजान: पाण्डवायोधनाय समानीता: शृण्वतां चापि तेषाम् । यथा समग्रं वचन मयोक्तं सहामात्यं श्रावयेथा नृपं तत्,अपने बाहुबलको अच्छी तरह जाननेवाले धीर-वीर किरीटथधारी अर्जुनने भावी युद्धके लिये उद्यत हो भगवान् श्रीकृष्णके समीप मुझसे इस प्रकार कहा है--“संजय! जो कालके गालमें जानेवाला, मन्दबुद्धि एवं महामूर्ख सदा मेरे साथ युद्ध करनेके लिये डींग हाँकता रहता है, उस कटुभाषी दुरात्मा सूतपुत्र कर्णको सुनाकर तथा और भी जो-जो राजालोग पाण्डवोंके साथ युद्ध करनेके लिये बुलाये गये हैं, उन सबको सुनाते हुए तुम कौरवोंकी मण्डलीमें मेरे द्वारा कही हुई सारी बातें मन्त्रियोंसहित धृतराष्ट्रपुत्र राजा दुर्योधनसे इस प्रकार कहना, जिससे वह अच्छी तरह सुन ले'---
sañjaya uvāca |
ye vai rājānaḥ pāṇḍavāyodhanāya samānītāḥ śṛṇvatāṃ cāpi teṣām |
yathā samagraṃ vacanaṃ mayoktaṃ sahāmātyaṃ śrāvayethā nṛpaṃ tat ||
“جو راجے پانڈوؤں کے خلاف جنگ کے لیے جمع کیے گئے ہیں، وہ بھی سنیں۔ جیسے میں نے پورا پیغام کہا ہے، ویسے ہی وزیروں سمیت اُس راجا (دُریودھن) کو سنا دینا۔”
संजय उवाच