Drupada’s Alarm and Inquiry Regarding Śikhaṇḍinī (द्रुपदस्य भय-विमर्शः)
अप ह< बक। है २ 2 द्विनवत्याधिकशततमो< ध्याय: शिखण्डीको पुरुषत्वकी प्राप्ति, द्रपद और हिरण्यवर्माकी प्रसन्नता, स्थूणाकर्णको कुबेरका शाप तथा भीष्मका शिखण्डीको न मारनेका निश्चय भीष्म उवाच शिखण्डिवाक्यं श्रुत्वाथ स यक्षो भरतर्षभ | प्रोवाच मनसा चिन्त्य दैवेनोपनिपीडित:
bhīṣma uvāca
śikhaṇḍivākyaṃ śrutvātha sa yakṣo bharatarṣabha |
provāca manasā cintya daivenopanipīḍitaḥ ||
شکھنڈی کی بات سن کر وہ یَکش—اے بھرت شریشٹھ—دل میں سوچ کر، دَیو (تقدیر) کے دباؤ سے مجبور ہو کر، بولا۔
भीष्म उवाच