न तु ते जयमाशासे त्वां विजेतुमहं स्थित: । गच्छ युध्यस्व धर्मेण प्रीतो5स्मि चरितेन ते,मैं तो तुम्हें विजयसूचक आशीर्वाद नहीं दे सकता; क्योंकि इस समय मैं तुम्हें पराजित करनेके लिये खड़ा हूँ। जाओ, धर्मपूर्वक युद्ध करो। तुम्हारे इस शिष्टाचारसे मैं बहुत प्रसन्न हूँ
لیکن میں تمہیں فتح کی دعا نہیں دے سکتا، کیونکہ اس وقت میں تمہیں مغلوب کرنے کے لیے کھڑا ہوں۔ جاؤ، دھرم کے مطابق جنگ کرو؛ تمہارے اس شائستہ برتاؤ سے میں خوش ہوں۔
राम उवाच