अम्बा–राम–भीष्म संवादः
Amba–Rama–Bhishma Dialogue on Vow and Refuge
“गुरोरप्यवलिप्तस्य कार्याकार्यमजानतः । उत्पथप्रतिपन्नस्य परित्यागो विधीयते”,“विशुद्ध हृदयवाले परम बुद्धिमान् राम! पुराणमें महात्मा मरुत्तके द्वारा कहा हुआ यह श्लोक सुननेमें आता है कि यदि गुरु भी गर्वमें आकर कर्तव्य और अकर्तव्यको न समझते हुए कुपथका आश्रय ले तो उसका परित्याग कर दिया जाता है
guror apy avaliptasya kāryākāryam ajānataḥ | utpatha-pratipannasya parityāgo vidhīyate ||
اگر استاد بھی غرور میں مگن ہو کر واجب و ناجائز کو نہ سمجھے اور کج راہ پر چل پڑے تو اس کا ترک کرنا ہی مقرر ہے۔
राम उवाच