अम्बाया रामजामदग्न्यशरणगमनम्
Ambā Seeks Refuge with Rāma Jāmadagnya
यदि सौभपतिर्भद्रे नियोक्तव्यो मतस्तव । नियोक्ष्यति महात्मा स रामस्त्वद्धितकाम्यया,भद्रे! यदि तुम्हारा यह विचार हो कि सौभपति शाल्वराजको ही विवाहके लिये विवश करना चाहिये तो महात्मा परशुराम तुम्हारे हितकी इच्छासे शाल्वराजको अवश्य इस कार्यमें नियुक्त करेंगे
اے بھدرے! اگر تمہاری رائے یہ ہو کہ سَوبھ پتی شالْو راج ہی کو نکاح کے لیے مجبور کیا جائے، تو مہاتما رام (پرشورام) تمہاری بھلائی کی خواہش سے شالْو راج کو ضرور اس کام پر آمادہ کر دیں گے۔
अकृतव्रण उवाच