Adhyāya 160: Arjuna’s Envoy-Message—Critique of Borrowed Valor and Pre-dawn Mobilization
द्रुपदस्य सपुत्रस्य विराटस्य च संनिधौ । भूमिपानां च सर्वेषां मध्ये वाक्यं जगाद ह,(संजय कहते हैं--) तब वहाँ बैठे हुए तेजस्वी महात्मा पाण्डवों, सूंजयों, मत्स्यों, यशस्वी श्रीकृष्ण तथा पुत्रोंसहित ट्रपद और विराटके समीप समस्त राजाओंके बीचमें उलूकने यह बात कही
دروپد کے بیٹوں سمیت اور وِراٹ کی موجودگی میں، اور تمام راجاؤں کے بیچ، اُس نے یہ بات کہی۔
युधिष्ठिर उवाच