भीष्मस्य दुर्योधनं प्रति कुलहितोपदेशः | Bhīṣma’s Counsel to Duryodhana on Dynastic Welfare
मया प्लवेन संग्राम तितीर्षन्ति दुरत्ययम् । अपारे पारकामा ये त्यजेयं तानहं कथम्,जो मुझको ही नौका बनाकर उसके सहारे दुर्लड्घ्य समरसागरको पार करना चाहते हैं और मेरे ही भरोसे अपार संकटसे पार होनेकी इच्छा रखते हैं, उन्हें इस संकटके समयमें कैसे त्याग दूँ?
mayā plavena saṅgrāmaṃ titīrṣanti duratyayam | apāre pārakāmā ye tyajeyaṃ tān ahaṃ katham ||
جو مجھے ہی کشتی بنا کر اس دشوارگذر جنگ کے سمندر کو پار کرنا چاہتے ہیں، اور بے کنار خطرے میں میرے سہارے دوسرے کنارے تک پہنچنے کی آرزو رکھتے ہیں—ایسے بحران کے وقت میں انہیں کیسے چھوڑ دوں؟
कर्ण उवाच