उद्योगपर्व अध्याय १३३ — संजये मातृउपदेशः
Udyoga Parva Adhyaya 133 — A Mother’s Counsel to Saṃjaya
अहं हि क्षत्रहददयं वेद यत् परिशाश्वतम्,स्वयं विधाताने जिसकी सृष्टि की है, प्राचीन और अत्यन्त प्राचीन पुरुषोंने जिसका वर्णन किया है, परवर्ती और अतिपरवर्ती सत्पुरुष जिसका वर्णन करेंगे तथा जो चिरन्तन एवं अविनाशी है, उस सनातन और उत्तम क्षत्रिय-हृदयको मैं जानती हूँ
میں اُس سَناتن اور برتر کشتریہ-دل کو جانتی ہوں جسے خود ودھاتا نے رچا ہے، جس کا بیان قدیم اور نہایت قدیم مردانِ حق نے کیا ہے۔
पुत्र उवाच