उद्योगपर्व — गान्धारी-उपदेशः
Udyoga Parva — Gandhārī’s Counsel to Duryodhana
अपि चाप्यवददू राजन् परमेष्ठी प्रजापति: । व्यूढे देवासुरे युद्धे5 भ्युद्यतेष्वायुधेषु च,'राजन्! इसके सिवा एक और उदाहरण लीजिये। एक समय प्रजापति ब्रह्माजीने जो बात कही थी, वही बता रहा हूँ। देवता और असुर युद्धके लिये मोर्चे बाँधकर खड़े थे। सबके अस्त्र-शस्त्र प्रहारके लिये ऊपर उठ गये थे। सारा संसार दो भागोंमें बँटकर विनाशके गर्तमें गिरना चाहता था। भारत! उस अवस्थामें सृष्टिकी रचना करनेवाले लोकभावन भगवान् ब्रह्माजीने स्पष्टरूपसे बता दिया कि इस युद्धमें दानवोंसहित दैत्यों तथा असुरोंकी पराजय होगी। आदित्य, वसु तथा रुद्र आदि देवता विजयी होंगे। देवता, असुर, मनुष्य, गन्धर्व, नाग तथा राक्षस--ये युद्धमें अत्यन्त कुपित होकर एक-दूसरेका वध करेंगे
api cāpy avadad rājan parameṣṭhī prajāpatiḥ | vyūḍhe devāsure yuddhe ’bhyudyateṣv āyudheṣu ca ||
اے راجن! مزید سنو—جب دیوتاؤں اور اسوروں کی جنگ میں دونوں لشکر صف آرا ہو چکے تھے اور ہتھیار وار کے لیے اٹھ چکے تھے، تب پرمیشٹھی پرجاپتی نے یہ بات کہی تھی۔
वैशम्पायन उवाच