राज्ञो वृत्त-गुण-संग्रहः (Conduct and the Thirty-Six Virtues of a King) / The King’s Code of Conduct
१३-दुष्टोंस अपना अभीष्ट कार्य न कहे। १४-अपने गुणोंका स्वयं ही वर्णन न करे। १५- श्रेष्ठ पुरुषोंस उनका धन न छीने। १६-नीच पुरुषोंका आश्रय न ले ।। नापरीक्ष्य नयेद् दण्डं न च मन्त्र प्रकाशयेत् । विसूजेन्न च लुब्धेभ्यो विश्वसेन्नापकारिषु,१७-अपराधकी अच्छी तरह जाँच पड़ताल किये बिना ही किसीको दण्ड न दे। १८- गुप्त मन्त्रणाको प्रकट न करे। १९-लोभियोंको धन न दे। २०-जिन्होंने कभी अपकार किया हो, उनपर विश्वास न करे
nāparīkṣya nayet daṇḍaṃ na ca mantraṃ prakāśayet | visṛjen na ca lubdhebhyo viśvasen nāpakāriṣu ||
بھیشم نے کہا—بغیر اچھی طرح جانچ پڑتال کے سزا نہ دے؛ خفیہ مشورہ ظاہر نہ کرے۔ لالچی لوگوں کے حوالے مال و دولت نہ کرے، اور جنہوں نے پہلے نقصان پہنچایا ہو اُن پر بھروسا نہ کرے۔
भीष्म उवाच