Daṇḍanīti and the King as the Cause of Yuga-Order (दण्डनीतिः राजधर्मश्च युगकारणत्वम्)
यथा पुत्रास्तथा पोत्रा द्रष्टव्यास्ते न संशय: । भक्तिश्नैषां न कर्तव्या व्यवहारे प्रदर्शिते,निःसंदेह राजाको चाहिये कि वह अपनी प्रजाको पुत्रों और पौत्रोंकी भाँति स्नेहदृष्टिसे देखे; परंतु जब न्याय करनेका अवसर प्राप्त हो, तब उसे स्नेहवश पक्षपात नहीं करना चाहिये
بادشاہ کو بے شک اپنی رعایا کو بیٹوں اور پوتوں کی مانند محبت بھری نگاہ سے دیکھنا چاہیے؛ مگر جب انصاف کا موقع آئے تو محبت کے باعث جانبداری نہیں کرنی چاہیے۔
भीष्म उवाच