Previous Verse
Next Verse

Shloka 82

Varṇa-dharma and Rājadharma: Yudhiṣṭhira’s Inquiry and Bhīṣma’s Normative Outline (वर्णधर्म-राजधर्म-प्रश्नोत्तरम्)

दशाध्यायसहस्तराणि सुब्रह्मण्यो महातपा:,महातपस्वी सुब्रह्मण्य भगवान्‌ पुरन्दरने जब इसका अध्ययन किया, उस समय इसमें दस हजार अध्याय थे। फिर उन्होंने भी इसका संक्षेप किया, जिससे यह पाँच हजार अध्यायोंका ग्रन्थ हो गया। तात! वही ग्रन्थ “बाहुदनतक” नामक नीतिशास्त्रके रूपमें विख्यात हुआ

مہاتپسی سُبرہمنیہ پُرندر نے جب اس کا مطالعہ کیا تو اس میں دس ہزار ابواب تھے۔ پھر انہوں نے بھی اسے مختصر کر کے پانچ ہزار ابواب کا بنا دیا۔ اے تات! وہی گرنتھ ‘باہودنتک’ نامی نیتی-شاستر کے طور پر یاد کیا جاتا ہے۔

भीष्म उवाच