Nārada’s Account of the Kaliṅga Svayaṃvara: Duryodhana’s Seizure and Karṇa’s Escort
तदनन्तर प्रहार करनेवालोंमें श्रेष्ठ कर्णने जल्दी-जल्दी बाण मारकर उन सब राजाओंको व्याकुल कर दिया, कोई धनुषसे रहित हो गये, कोई अपने धनुषको ऊपर ही उठाये रह गये, कोई बाण, कोई रथशक्ति और कोई गदा लिये रह गये। जो जिस अवस्थामें थे, उसी अवस्थामें उन्हें व्याकूल करके कर्णने उनके सारथियोंको मार डाला और उन बहुसंख्यक नरेशोंको परास्त कर दिया ।। ते स्वयं वाहयन्तो<श्वान् पाहि पाहीति वादिन: । व्यपेयुस्ते रणं हित्वा राजानो भग्नमानसा:,वे पराजित भूपाल भग्नमनोरथ हो स्वयं ही घोड़े हाँकते और “बचाओ बचाओ,' की रट लगाते हुए युद्ध छोड़कर भाग गये
te svayaṁ vāhayanto 'śvān pāhi pāhīti vādinaḥ | vyapeyus te raṇaṁ hitvā rājāno bhagnamānasāḥ ||
وہ مغلوب بادشاہ دل شکستہ ہو کر خود ہی گھوڑے ہانکتے اور ‘بچاؤ، بچاؤ’ کی دہائی دیتے ہوئے میدانِ جنگ چھوڑ کر بھاگ گئے۔
नारद उवाच