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Shloka 49

दानपात्रापात्र-निर्णयः / Determining Worthy Gifts, Recipients, and Permissible Food

तथा स्वलंकृतद्ारं नगरं पाण्डुनन्दन: । स्तूयमान: शुभैर्वाक्यै: प्रविवेश सुहृददूवृत:,अपने सुहृदोंसे घिरे हुए पाण्डुनन्दन युधिष्ठिरने इस प्रकार सजे सजाये द्वारवाले नगर --हस्तिनापुरमें प्रवेश किया। उस समय सुन्दर वचनोंद्वारा उनकी स्तुति की जा रही थी

یوں آراستہ دروازوں والے شہر میں پاندو نندن یُدھِشٹھِر اپنے خیرخواہوں کے گھیرے میں داخل ہوا۔ اس وقت مبارک کلمات کے ساتھ اس کی ستائش کی جا رہی تھی۔

वैशम्पायन उवाच