Atithi’s Direction to the Nāga-sage Padma at Naimiṣa (अतिथ्युपदेशः—नैमिषे पद्मनागोपाख्यानप्रस्तावः)
अथ ता विश्वरूपो<ब्रवीदद्यैव सेन्द्रा देवा न भविष्यन्तीति ततो मन्त्रान् जजाप तैर्मन्त्रैरवर्धत त्रिशिरा एकेनास्थेन सर्वलोकेषु यथावद् द्विजै: क्रियावद्धियज्ञेषु सुहुतं सोम॑ पपावेकेनान्नमेकेन सेन्द्रान् देवानथेन्द्रस्तं विवर्धभानं सोमपानाप्यायितसर्वगात्रं दृष्टवा चिन्तामापेदे सह देवै:,तब विश्वरूपने उनसे कहा--“आज ही इन्द्र आदि सम्पूर्ण देवताओंका अभाव हो जायगा।” ऐसा कहकर वे मन्त्रोंका जप करने लगे। उन मन्त्रोंसे उनकी शक्ति बहुत बढ़ गयी। तीन सिरोंवाले विश्वरूप अपने एक मुखसे सारे संसारके क्रियानिष्ठ ब्राह्मणोंद्वारा विधिपूर्वक यज्ञोंमें होमे गये सोमरसको पी लेते थे, दूसरेसे अन्न खाते थे और तीसरेसे इन्द्र आदि देवताओंके तेजको पी लेते थे। इन्द्रने देखा, विश्वरूपका सारा शरीर सोमपानसे परिपुष्ट हो रहा है। यह देखकर देवताओंसहित इन्द्रको बड़ी चिन्ता हुई
atha tā viśvarūpo 'bravīd adyaiva sendrā devā na bhaviṣyantīti | tato mantrān jajāpa tair mantrair avardhata triśirā | ekenāsthen sarvalokeṣu yathāvad dvijaiḥ kriyāvaddhir yajñeṣu suhutaṃ somaṃ papāv ekenānnam ekena sendrān devān | athendraḥ taṃ vivardhamānaṃ somapānāpyāyita-sarvagātraṃ dṛṣṭvā cintām āpede saha devaiḥ ||
پھر وشورُوپ نے ان سے کہا: “آج ہی اندر سمیت تمام دیوتا نیست و نابود ہو جائیں گے۔” یہ کہہ کر وہ منتر جپنے لگا؛ ان منتروں سے تین سروں والا وشورُوپ بے حد قوتور ہو گیا۔ ایک منہ سے وہ تمام جہانوں میں کرم نِشٹھ برہمنوں کے ذریعے یَجْنوں میں قاعدے کے مطابق چڑھایا گیا سوم رس پی جاتا، دوسرے سے اناج کھاتا، اور تیسرے سے اندر سمیت دیوتاؤں کا تَیَج ہی نگل لیتا۔ اندر نے دیکھا کہ سوم پینے سے اس کا سارا بدن پُشت اور بھرپور ہو رہا ہے؛ یہ دیکھ کر اندر دیوتاؤں کے ساتھ سخت اندیشے میں پڑ گیا۔
तास्त्वाष्ट उवाच क्व गमिष्यथास्यतां तावन्मया सह श्रेयो भविष्यन्तीति