Nāmānirukta of Nārāyaṇa (Keśava–Viṣṇu–Vāsudeva) and the Rudra–Nārāyaṇa Unity Theme
पुज्यमाना द्विजैर्नित्यं मोदमाना गृहे रता: । याजनाध्यापनरता: श्रीमन््तो लोकविश्रुता:,पृथ्वीपर उतरकर उन्होंने चातुहोत्र कर्म (अग्निहोत्रसे लेकर सोमयागतक) का प्रचार किया और गृहस्थाश्रममें प्रवेश करके ब्राह्मण, क्षत्रिय तथा वैश्योंके यज्ञ कराते हुए वे द्विजातियोंसे पूजित हो बड़े आनन्दसे रहने लगे। यज्ञ कराने और वेदोंकी शिक्षा देनेमें ही वे तत्पर रहते थे। इन्हीं कर्मोके कारण वे श्रीसम्पन्न और लोक-विख्यात हो गये थे
pūjyamānā dvijair nityaṁ modamānā gṛhe ratāḥ | yājanādhyāpanaratāḥ śrīmanto lokaviśrutāḥ ||
وہ دوِجوں کی طرف سے ہمیشہ معزز، مسلسل مسرور اور گِرہستھ زندگی میں رچے بسے تھے۔ دوسروں کے لیے یَجْن کرانا اور وید کی تعلیم دینا ہی ان کی لگن تھی؛ انہی فرائض کے باعث وہ دولت مند اور عالم میں مشہور ہو گئے۔
भीष्म उवाच