अव्यक्त-गुण-पुरुषविवेकः | Avyakta, Guṇas, and Discrimination of Puruṣa
अलिड्जा प्रकृतिं त्वाहुर्लिज्जिरनुमिमीमहे । तथैव पौरुषं लिड्रमनुमानाद्धि मन्यते,मुनिगण प्रकृतिको लिंगरहित बताते हैं; किंतु हमलोग विशेष हेतुओंके द्वारा ही उसका अनुमान कर सकते हैं। इसी प्रकार अनुमानद्वारा ही हमें पुरुषके स्वरूपका अर्थात् उसके होनेका ज्ञान होता है
مُنیوں کا کہنا ہے کہ پرکرتی بے لِنگ ہے؛ مگر ہم اسے لِنگ (علامتوں) کے ذریعے ہی قیاساً جانتے ہیں۔ اسی طرح پُرُش کی حقیقت/ہستی بھی قیاس ہی سے معلوم ہوتی ہے۔
वसिष्ठ उवाच