इन्द्रियेः सह सुप्तस्य देहिन: शत्रुतापन । सूक्ष्मश्वरति सर्वत्र नभसीव समीरण:,शत्रुओंको ताप देनेवाले नरेश! जब शरीरधारी प्राणी इन्द्रियोंसहित निद्रित हो जाता है, तब उसका सूक्ष्मशरीर आकाशमें वायुके समान सर्वत्र विचरण करने लगता है अर्थात् स्वप्न देखने लगता है
اے دشمنوں کو جلانے والے بادشاہ! جب مجسم جاندار حواس سمیت سو جاتا ہے تو اس کا لطیف جسم آسمان میں ہوا کی مانند ہر سو گردش کرنے لگتا ہے—یعنی وہ خواب دیکھتا ہے۔
भीष्म उवाच