अध्याय २९७ — श्रेयः, धृति, दान-नियमाः
Welfare, Steadfastness, and Norms of Giving
कथं न विप्रणश्येम योनितो<स्या इति प्रभो । कुर्वन्ति धर्म मनुजा: श्रुतिप्रामाण्यदर्शनात्,'प्रभो! हम कौन ऐसा उपाय करें, जिससे हमें इस मनुष्य-योनिसे नीचे न गिरना पड़े' यह सोचकर और वैदिक प्रमाणोंपर विचार करके मनुष्य धर्मका अनुष्ठान करते हैं
kathaṁ na vipraṇaśyema yonito ’syā iti prabho | kurvanti dharma manuṣyāḥ śrutiprāmāṇyadarśanāt ||
‘اے پروردگار! ہم کیا تدبیر کریں کہ اس انسانی یَونی سے نیچے نہ گریں؟’—یہ سوچ کر، اور شروتی (وید) کی حجّت و سند پر غور کر کے لوگ دھرم کا انुष्ठان کرتے ہیں۔
पराशर उवाच