Śoka-śamana: Kṛṣṇa’s Consolation and Nārada’s Exempla to Sṛñjaya
Chapter 29
रामं॑ दाशरथिं चैव मृतं सूंजय शुश्रुम । योडन्वकम्पत वै नित्यं प्रजा: पुत्रानिवौरसान्,'सूंजय! सुननेमें आया है कि दशरथनन्दन भगवान् श्रीरामजी भी यहाँसे परम धामको चले गये थे, जो सदा अपनी प्रजापर वैसी ही कृपा रखते थे, जैसे-पिता अपने औरस पुत्रोंपर रखता है
وایو نے کہا— اے سُرنجَے! ہم نے سنا ہے کہ دَشرتھ کے نندن رام بھی وفات پا گئے؛ وہ ہمیشہ اپنی رعایا پر ایسی ہی شفقت کرتے تھے جیسے باپ اپنے صلبی بیٹوں پر کرتا ہے۔
वायुदेव उवाच