कपिल–स्यूमरश्मि संवादः
Kapila and Syūmaraśmi on Renunciation, Householder Support, and Epistemic Authority
रसांश्व तांस्तान् विप्रर्षे मद्यवर्ज्यान् बहूनहम् क्रीत्वा वै प्रतिविक्रीणे परहस्तादमायया,विप्रर्षे! मेरे यहाँ मदिरा नहीं बेची जाती, उसे छोड़कर बहुत-से पीनेयोग्य रसोंको दूसरोंसे खरीदकर बेचता हूँ। माल बेचनेमें छल-कपट एवं असत्यसे काम नहीं लेता
اے برہمن رِشی! میرے یہاں شراب نہیں بیچی جاتی؛ اس کے سوا بہت سے پینے کے رس میں دوسروں سے خرید کر بیچتا ہوں۔ اور بیچنے میں میں فریب، مکر اور جھوٹ سے کام نہیں لیتا۔
तुलाधार उवाच