मुनि जाजलिकी तपस्या स रक्षमाणस्त्वण्डानि कुलिज्ञानां धृतव्रत: । तथैव तस्थीौ धर्मात्मा निर्विचेष्ट: समाहित:,दृढ़तापूर्वक व्रतका पालन करनेवाले वे एकाग्रचित्त धर्मात्मा मुनि उन पक्षियोंके अण्डोंकी रक्षा करते हुए पूर्ववत् निश्वेष्टभावसे खड़े रहे
پختہ عہد کے پابند، یکسو دل دھرماتما مُنی جاجلی اُن کُلیڈک پرندوں کے انڈوں کی حفاظت کرتے ہوئے پہلے کی طرح بےحرکت، یکسو اور ثابت قدم کھڑے رہے۔
भीष्म उवाच