कपिलगोसंवादे गृहस्थ-त्यागधर्मयोः प्रमाण्यविचारः
Kapila–Cow Dialogue: Authority of Householder and Renunciant Dharmas
भीष्म उवाच अतीव तपसा युक्तो घोरेण स बभूव ह । तथोपस्पर्शनरत:ः सायं प्रातर्महातपा:,भीष्मजीने कहा--बेटा! जाजलि मुनि महान् तपस्वी थे और अत्यन्त घोर तपस्यामें लगे हुए थे। वे प्रतेदिन सायंकाल और प्रातःकाल स्नान एवं संध्योपासना करके विधिपूर्वक अग्निहोत्र करते और वेदोंके स्वाध्यायमें तत्पर रहते थे। ब्रह्मर्षि जाजलि वानप्रस्थके धर्मकी विधिको जानने और पालनेवाले थे, वे अपने तेजसे प्रज्वलित हो रहे थे
bhīṣma uvāca | atīva tapasā yukto ghoreṇa sa babhūva ha | tathopasparśana-rataḥ sāyaṃ prātar mahā-tapāḥ |
بھیشم نے کہا—وہ نہایت سخت تپسیا سے یکت ہو کر حقیقتاً ایک عظیم تپسوی بن گیا۔ وہ شام و صبح غسل و طہارت اور سندھیا اُپاسنا میں مشغول رہتا اور وانپرسٹھ آشرم کے فرائض کو باقاعدگی سے ادا کرتا تھا۔
भीष्म उवाच