Daṇḍa, Ahiṃsā, and Proportional Kingship: The Dyumatsena–Satyavān Dialogue (दण्ड-अहिंसा-विवेकः)
भूयांसो हृदये ये मे प्रश्नास्ते व्याह्ृतास्त्वया । इदं त्वन्यत् प्रवक्ष्यामि न राजन् निग्रहादिव,मेरे हृदयमें जो बहुत-से प्रश्न उठे थे, उन सबका निराकरण आपने कर दिया। महाराज! अब मैं यह दूसरा प्रश्न उपस्थित कर रहा हूँ। इसमें जिज्ञासा ही कारण है, दुराग्रह नहीं
میرے دل میں جو بہت سے سوال اٹھے تھے، آپ نے اُن سب کی وضاحت کر دی۔ مہاراج! اب میں ایک اور سوال پیش کرتا ہوں؛ اس کی وجہ محض جستجو ہے، ضد نہیں۔
युधिछिर उवाच