राजधर्मः—राष्ट्ररक्षणं, दण्डनीतिः, हयग्रीवोपाख्यानम्
Royal Duty: Protection, Penal Policy, and the Hayagrīva Exemplum
नष्टे धने वा दारे वा पुत्रे पितरि वा मृते । अहो दुःखमिति ध्यायन् दुःखस्यापचितिं चरेत्,“धनके नष्ट होनेपर अथवा स्त्री, पुत्र या पिताकी मृत्यु होनेपर मनुष्य “हाय! मुझपर बड़ा भारी दुःख आ पड़ा” इस प्रकार चिन्ता करते हुए उस दुःखकी निवृत्तिकी चेष्टा करता है
جب مال ضائع ہو جائے، یا بیوی، بیٹا یا باپ مر جائے، تو انسان ‘ہائے! کیسا بڑا دکھ!’ ایسا سوچتے ہوئے اس دکھ کے ازالے کی تدبیر کرتا ہے۔
व्यास उवाच