Adhyātma-krama: Indriya–Manas–Buddhi–Ātman Hierarchy and Citta-Prasāda (आध्यात्मक्रमः)
निश्चितं कालनानात्वमनादिनिधनं च यत् । कीर्तितं यत् पुरस्तान्मे सूते यच्चात्ति च प्रजा:,इसी प्रकार निश्चय ही कालके भी अनेक रूप हैं। उसका न आदि है और न अन्त। वही प्रजाकी सृष्टि करता है और अन्तमें वही सबको अपना ग्रास बना लेता है। यह बात मैंने तुमको पहले ही बता दी है
یقیناً زمانے (کال) کی بہت سی صورتیں ہیں؛ نہ اس کی ابتدا ہے نہ انتہا۔ وہی مخلوق کو پیدا کرتا ہے اور آخرکار وہی سب کو نگل لیتا ہے—یہ بات میں تمہیں پہلے ہی بتا چکا ہوں۔
व्यास उवाच