भृगु–भरद्वाजसंवादः: वर्णभेदस्य कर्माधारितव्याख्या
Bhrigu–Bharadvaja Dialogue: A Karma-Based Account of Varṇa
आर्त: स पतित: क्रुद्धस्त्यक्त्वा55त्मानमथाब्रवीत् । मरिष्याम्यधनस्येह जीवितार्थों न विद्यते,वे पीड़ासे कराहकर गिर पड़े और कुपित होकर आत्महत्याके लिये उद्यत हो इस प्रकार बोले--“अब मैं प्राण दे दूँगा; क्योंकि इस संसारमें निर्धन मनुष्यका जीवन व्यर्थ है!
وہ درد سے کراہتا ہوا گر پڑا اور غصّے میں خودکشی پر آمادہ ہو کر بولا— “اب میں جان دے دوں گا؛ کیونکہ اس دنیا میں مفلس آدمی کی زندگی بے معنی ہے۔”
भीष्म उवाच