अनर्थों हि भवेदर्थों दैवात् पूर्वकृतेन वा । सम्बुद्धाहं निराकारा नाहमद्याजितेन्द्रिया,भाग्यसे अथवा पूर्वकृत शुभ कर्मोके प्रभावसे कभी-कभी अनर्थ भी अर्थरूप हो जाता है, जिससे आज निराश होकर मैं उत्तम ज्ञानसे सम्पन्न हो गयी हूँ। अब मैं अजितेन्द्रिय नहीं रही हूँ
کبھی کبھی تقدیر کے سبب یا پہلے کیے ہوئے اعمال کے اثر سے انَرتھ بھی ارتھ بن جاتا ہے۔ اسی لیے آج میں بیدار و باخبر اور بے آرزو ہو گئی ہوں؛ آج میری حواس بے قابو نہیں رہے۔
ब्राह्मण उवाच