संकेते पिड़ला वेश्या कान्तेनासीद् विनाकृता । अथ कृच्छूगता शान्ता बुद्धिमास्थापयत् तदा,एक बार पिड़ला वेश्या बहुत देरतक संकेत स्थानपर बैठी रही, तब भी उसका प्रियतम उसके पास नहीं आया; इससे वह बड़े कष्टमें पड़ गयी, तथापि शान्त रहकर इस प्रकार विचार करने लगी
ایک بار پِڈلا ویشیا اشارہ گاہ پر بہت دیر تک بیٹھی رہی، مگر اس کا محبوب نہ آیا۔ اس سے وہ سخت کرب میں مبتلا ہوئی؛ پھر بھی وہ پرسکون رہی اور اسی وقت اپنی عقل کو جما کر یوں سوچنے لگی۔
ब्राह्मण उवाच