विरुद्धानीह शास्त्राणि ये पश्यन्ति कुरूद्वह । विधित्सा जायते तेषां तत्त्वज्ञानान्निवर्तते,कुरुश्रेष्ठ! जो लोग धर्मके विरोधी शास्त्रोंका अवलोकन करते हैं, उनके मनमें अनुचित कर्म करनेकी इच्छारूप विधित्सा उत्पन्न होती है। यह तत्त्वज्ञानसे निवृत्त होती है
اے کُرُو وِر! جو لوگ یہاں دھرم کے مخالف شاستروں کو دیکھتے ہیں، اُن کے دل میں ناروا عمل کرنے کی خواہش، یعنی ‘وِدھِتسا’ پیدا ہوتی ہے؛ مگر تَتّوَ گیان سے وہ خواہش مٹ جاتی ہے۔
भीष्म उवाच