Bala and Dharma in Kṣatriya Governance (बल-धर्म सम्बन्धः)
अपास्य राजधानी वा तरेद् द्रव्येण चापदम् | तद्धभावयुक्तो द्रव्याणि जीवन् पुनरुपार्जयेत्,अथवा आवश्यकता हो तो अपनी राजधानीको भी छोड़कर बहुत-सा द्रव्य देकर उस विपत्तिसे पार हो जाय। यदि वह जीवित रहे तो राजोचित गुणसे युक्त होनेपर पुन: धनका उपार्जन कर सकता है
ضرورت پڑے تو اپنی راجدھانی بھی چھوڑ کر بہت سا مال دے کر اس آفت سے پار ہو جانا چاہیے۔ اگر وہ زندہ رہے اور شاہانہ اوصاف سے آراستہ ہو تو پھر دوبارہ دولت کما سکتا ہے۔
भीष्म उवाच