Gautama–Yama Saṃvāda: Mātṛ-Pitṛ-Ṛṇa (Debt to Parents) and Śubha-Loka Attainment
अपना छा | अ्--#रू+ षड्विशरत्याधेकशततमो< ध्याय: राजा सुमित्रका मृगकी खोज किक ए तपस्वी मुनियोके आश्रमपर पहुँचना और उनसे आशाके विषयमें प्रश्न करना भीष्म उवाच प्रविश्य स महारण्यं तापसानामथाश्रमम् | आससाद ततो राजा श्रान्तश्नोपाविशत् तदा,भीष्मजी कहते हैं--युधिष्ठिर! उस महान् वनमें प्रवेश करके राजा सुमित्र तापसोंके आश्रमपर जा पहुँचे और वहाँ थककर बैठ गये
bhīṣma uvāca | praviśya sa mahāraṇyaṃ tāpasānām athāśramam | āsasāda tato rājā śrāntaḥ snopāviśat tadā ||
بھیشم نے کہا—اے یُدھشٹھِر! اس عظیم جنگل میں داخل ہو کر بادشاہ (سُمِتر) تپسویوں کے آشرم تک جا پہنچا۔ پھر تھکا ہارا وہیں بیٹھ گیا۔
भीष्म उवाच