त्रिवर्गमूलनिश्चयः — Determining the Roots of Dharma, Artha, and Kāma
Mahābhārata, Śānti-parva 123
तत्र शुद्ध हिमवतो मेरौ कनकपर्वते । यत्र मुज्जावटे रामो जटाहरणमादिशत्,राजेन्द्र! वह स्थान सुवर्णमय पर्वत सुमेरुके समीपवर्ती हिमालयके शिखरपर है, जहाँ मुंजावटमें परशुरामजीने अपनी जटाएँ बाँधनेका आदेश दिया था। तभीसे कठोर व्रतका पालन करनेवाले ऋषियोंने उस रुद्रसेवित प्रदेशको मुंजपृष्ठ नाम दे दिया
tatra śuddhe himavato merau kanakaparvate | yatra muñjāvaṭe rāmo jaṭāharaṇam ādiśat, rājendra |
اے راجندر! وہ پاکیزہ مقام ہِمَوَت میں، مَیرو کے قریب سنہری پہاڑ پر ہے؛ جہاں مُنجاوَٹ میں رام (پرشورام) نے اپنی جٹاؤں کو باندھنے/ترتیب دینے کا حکم دیا تھا۔
भीष्म उवाच