Vyāghra–Gomāyu Saṃvāda (व्याघ्रगोमायु संवाद) — Testing Character Beneath Appearances
सुदुःखं पुरुषज्ञानं चित्त होषां चलाचलम् । समर्थों वाप्पशड्को वा शतेष्वेकोडधिगम्यते,“योग्य मनुष्यको पहचानना राजाओंके लिये अत्यन्त दुष्कर है; क्योंकि उनका चित्त चंचल होता है, सैकड़ोंमेंसे कोई एक ही ऐसा मिलता है, जो सब प्रकारसे सुयोग्य होता हुआ भी संदेहसे परे हो
بادشاہوں کے لیے اہل آدمی کو پہچاننا نہایت دشوار ہے، کیونکہ لوگوں کا دل چنچل ہوتا ہے۔ سینکڑوں میں کوئی ایک ہی ایسا ملتا ہے جو ہر طرح سے قابل ہو کر بھی شک سے بالاتر ہو۔
भीष्म उवाच