Vāg-yuddha and Nimitta-darśana before the Gadāyuddha
Verbal Duel and Omens
तेषां मध्ये महाबाहु: श्रीमान् केशवपूर्वज: । उपविष्टो महाराज पूज्यमान: समन्ततः,दुर्योधनकी यह बात सुनकर सब लोगोंने उसे स्वीकार कर लिया, फिर तो राजाओंका वह विशाल समूह वहाँ सब ओर बैठ गया। नरेशोंकी वह मण्डली आकाशमें सूर्यमण्डलके समान दिखायी दे रही थी। उन सबके बीचमें भगवान् श्रीकृष्णके बड़े भ्राता तेजस्वी महाबाहु बलरामजी विराजमान हुए। महाराज! सब ओरसे सम्मानित होते हुए नीलाम्बरधारी, गौरकान्ति बलभद्रजी राजाओंके बीचमें वैसे ही शोभा पा रहे थे, जैसे रात्रिमें नक्षत्रोंसे घिरे हुए पूर्ण चन्द्रमा सुशोभित होते हैं
teṣāṁ madhye mahābāhuḥ śrīmān keśava-pūrvajaḥ | upaviṣṭo mahārāja pūjyamānaḥ samantataḥ ||
اے مہاراج! ان کے درمیان شریمان، مہاباہو، کیشو (کرشن) کے بڑے بھائی بلرام ہر سمت سے معزز و مُکرم ہو کر بیٹھے تھے۔
संजय उवाच