धृतराष्ट्र-संजय-संवादः — दुर्योधनस्य ह्रदप्रवेशः
Dhṛtarāṣṭra–Saṃjaya Dialogue: Duryodhana’s Entry into the Lake
अधिज्यं बलवत् कृत्वा व्याक्षिपन् सुमहद् धनु:,उन्होंने एक विशाल धनुषपर बलपूर्वक प्रत्यंचा चढ़ाकर शिलापर तेज किये हुए गीधके पंखोंवाले बाणोंद्वारा शकुनिपर आक्रमण किया और जैसे किसी विशाल गजराजको अंकुशोंसे मारा जाय, उसी प्रकार कुपित हो उसको गहरी चोट पहुँचायी
اس نے عظیم کمان پر زور سے چِلّہ چڑھا کر، پتھر پر تیز کیے ہوئے گِدھ کے پروں والے تیروں سے شکنی پر یلغار کی۔ غضب میں اس نے اسے یوں گہرا زخم دیا جیسے تیز انکوشوں سے ایک بڑے ہاتھی کو ہانکا جاتا ہے۔
संजय उवाच