भाविन्यर्थ हि सत्स्त्रीणां वैकृतं नोपजायते । गुरुधर्माभिगुप्ता च श्रेय: क्षिप्रमवाप्स्यसि,“जो बात अवश्य होनेवाली है उसके होनेपर साध्वी स्त्रियोंके मनमें व्याकुलता नहीं होती। तुम अपने श्रेष्ठ धर्मसे सुरक्षित रहकर शीघ्र ही कल्याण प्राप्त करोगी
“جو بات ہونی ہی ہے، اس کے واقع ہو جانے پر بھی نیک و پاک دامن عورتوں کے دل میں اضطراب پیدا نہیں ہوتا۔ تم اپنے برتر دھرم کی حفاظت میں رہ کر جلد ہی بھلائی اور فلاح پاؤ گی۔”
वैशमग्पायन उवाच