युधिष्ठिर उदाच धातुर्नियोगाद् भूतानि प्राप्रुवन्ति शुभाशुभम् । न निवृत्तिस्तयोरस्ति देवितव्यं पुनर्यदि,युधिष्ठिरने कहा--समस्त प्राणी विधाताकी प्रेरणासे शुभ और अशुभ फल प्राप्त करते हैं। उन्हें कोई टाल नहीं सकता। जान पड़ता है, मुझे फिर जूआ खेलना पड़ेगा
یُدھشٹھِر نے کہا—خالق کے حکم سے جاندار نیک و بد پھل پاتے ہیں؛ ان دونوں سے کوئی بچ نکلنے کی راہ نہیں۔ پس اگر یہی ہونا ہے تو مجھے پھر جوا کھیلنا پڑے گا۔
वैशम्पायन उवाच