एतानर्घ्यानभिगतानाहु: संवत्सरोषितान् । त इमे कालपूगस्य महतो<स्मानुपागता:,'ये यदि एक वर्ष बिताकर अपने यहाँ आवें तो इनके लिये अर्घ्य निवेदन करके इनकी पूजा करनी चाहिये, ऐसा शास्त्रज्ञ पुरुषोंका कथन है। ये सभी नरेश हमारे यहाँ सुदीर्घकालके पश्चात् पधारे हैं
اہلِ شاستر کہتے ہیں کہ جو ایک برس کے بعد ہمارے یہاں آئیں وہ اَर्घْی کے مستحق ہوتے ہیں۔ یہ سبھی راجے بھی طویل مدت کے بعد ہمارے پاس تشریف لائے ہیں۔
वैशम्पायन उवाच