Adhyāya 8: Saṃprahāra-varṇana and Bhīma–Kṣemadhūrti Dvipa-Yuddha
Combat Description and Elephant Duel
वृषभो वृषभस्येव यो युद्धे न निवर्तते । शत्रोरपि महेन्द्रस्य वज़संहननो युवा,धृतराष्ट्र बोले--संजय! अधिरथका वीर पुत्र कर्ण सिंह और हाथीके समान पराक्रमी था। उसके कंधे साँड़के कंधोंके समान हृष्टपुष्ट थे। उसकी आँखें और चाल-ढाल भी साँड़के ही सदृश थीं। वह स्वयं भी दानकी वर्षा करनेके कारण वृषभस्वरूप था। रणभूमिमें विचरता हुआ कर्ण इन्द्र-जैसे शत्रुसे पाला पड़नेपर भी साँड़के समान कभी युद्धसे पीछे नहीं हटता था। उसकी युवा-अवस्था थी। उसका शरीर इतना सुदृढ़ था, मानो वज्ञसे गढ़ा गया हो
vṛṣabho vṛṣabhasyeva yo yuddhe na nivartate | śatror api mahendrasya vajrasaṃhanano yuvā ||
وہ بیلوں میں بیل تھا—جو جنگ میں کبھی پلٹتا نہیں۔ مہندر (اندر) جیسے دشمن کے سامنے بھی وہ جوان، وجر کی طرح سخت بدن والا، پیچھے نہ ہٹا۔
वैशम्पायन उवाच