कर्णपर्व — अध्याय ५९
Arjuna Breaks the Encirclement; Bhīma Reinforces
इस प्रकार श्रीमह्ााभारत कर्णपर्वमें अश्वत्थामाका पलायनविषयक उनसठवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥/ ५९ ॥। हि 7 छा हर षष्टितमो< ध्याय: श्रीकृष्णका अर्जुनसे दुर्योधन और कर्णके पराक्रमका वर्णन करके कर्णको मारनेके लिये अर्जुनको उत्साहित करना तथा भीमसेनके दुष्कर पराक्रमका वर्णन करना संजय उवाच एतस्मिन्नन्तरे कृष्ण: पार्थ वचनमत्रवीत् । दर्शयन्निव कौन्तेयं धर्मराजं युधिष्ठिरम्,संजय कहते हैं--राजन्! इसी समय भगवान् श्रीकृष्णने अर्जुनको धर्मराज युधिष्ठिरका दर्शन कराते हुए-से इस प्रकार कहा--
sañjaya uvāca | etasminn antare kṛṣṇaḥ pārtha vacanam abravīt | darśayann iva kaunteyaṃ dharmarājaṃ yudhiṣṭhiram |
یوں شری مہابھارت کے کرن پَرو میں اشوتھاما کے فرار سے متعلق اٹھاونواں ادھیائے مکمل ہوا۔ سنجے نے کہا—اے راجن! اسی لمحے بھگوان شری کرشن نے، گویا کَونتیہ ارجن کو دھرم راج یُدھشٹھِر کا دیدار کرا رہے ہوں، پارتھ سے اس طرح کہا۔
संजय उवाच