न हि मां समरे सोदुं संशक्तोडग्निं तरुर्यथा । अवश्यं तु मया वाच्यं येन हीनो5स्मि फाल्गुनात्,जैसे वृक्ष अग्निका आक्रमण नहीं सह सकता, उसी प्रकार अर्जुनमें ऐसी शक्ति नहीं है कि मेरा वेग सह सकें; परंतु जिस बातमें मैं अर्जुनसे कम हूँ, वह भी मुझे अवश्य ही बता देना उचित है
جس طرح درخت آگ کے حملے کو برداشت نہیں کر سکتا، اسی طرح ارجن میں ایسی طاقت نہیں کہ وہ میرے زور و رفتار کو سہہ سکے؛ مگر جس بات میں میں فالگن سے کم ہوں، وہ بھی مجھے ضرور بتانا مناسب ہے۔
कर्ण उवाच